कुछ मज़ेदार लम्हे…

February 21, 2011

गब्बर सिंह का सटीक चरित्र चित्रण

Filed under: हिंदी — Yogesh Marwaha @ 18:06
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  1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था – पुराने और मैले कपड़े, बड़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन – जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! “जो डर गया, सो मर गया” जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.
  2. दयालु प्रवृति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था, इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सजा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था, पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.
  3. नृत्य-संगीत का शौक़ीन: “महबूबा ओ महबूबा” गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. बसंती की पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्य-प्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसंती के अंदर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह है कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.
  4. अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने काम से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.
  5. हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हँसाया था, ताकि वो हँसते-हँसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक युग का ‘लाफिंग बुद्धा’ था.
  6. नारी के प्रति सम्मान: बसंती जैसी सुंदर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.
  7. भिक्षुक जीवन: उसने हिंदू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और दुसरे आस-पास के गांवों से उसे जो भी सुखा-कच्चा मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का कि उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.
  8. सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सेंकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किये सो जाएँ. सरकार ने उस पर ५०,००० रूपए का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.
Source: E-mail
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